हमारे बारे में

ग्रामीण स्वयं-सहायता समूह द्वारा निर्मित उत्पादों हेतु एक आधार मंच

वर्ष 2004-05 में भोपाल हाट का गठन गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले स्वयं सहायता समूहों का स्वरोजगार उपलब्ध कराने एवं सीधे बाजार से जोडने के उद्देश्य से किया गया था। विगत 10 वर्षो में भोपाल हाट में राज्य व राष्ट्रीय स्तर के मेलोें के आयोजन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों का उनक उत्पादित वस्तुओं के प्रदर्शन एवं विक्रय का अवसर मिला है।

वर्ष 2005 से अब तक भोपाल हाट परिसर में 14 रीजनल सरस मेले एवं 138 राज्य स्तरीय मेलों का आयोजन किया गया इसी के साथ अन्य विभागों एवं संस्थाओं द्वारा लगभग 58 मेलों के आयोजन हेतु भोपाल हाट परिसर उपलब्ध कराया गया।

इस प्रकार भोपाल हाट परिसर में अब तक लगभग 196 मेलों का आयोजन किया जा चुका है। इन समूहों से जुडे 3 लाख 25 हजार स्वरोजगारी परिवारों का जीविकापार्जन हो रहा है।

भोपाल हाट परिसर देश में माॅडल के रूप् में जाना जाता है। अनेक राज्य भोपाल हाट की तर्ज पर अपने राज्यों में हाट विकसित किये जाने के प्रयास कर रहे है।

विज़न

अधिक से अधिक मात्रा में व्यवसायिक मेलों के द्वारा प्रदेष के गरीबी रेखा से जीवन यापन करना वाले ग्रामीण स्व सहायता समूहों को उनके द्वारा निर्मित उत्पादो के विक्रय हेतु बिचैलियों की भूमिका समाप्त कर सीधे बाजार उपलब्ध कराना ताकी उन्हें अधिक से अधिक लाभ अर्जित हो सकें।

मिशन

स्व सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादोे के विक्रय के लिये समस्त आवष्यक सुविधाएं निः शुल्क प्रदान कराते हुये उन्हें एक बेहतर मंच व्यवसाय हेतु उपलब्ध कराना ताकी उनकी व्यवसायक समझ एवं दृष्टीकोण को व्यापकता प्राप्त हो तथा वे बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकें।

संस्था का उद्देश्य

  • गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को स्वसहायता समूहों मे गठित कर स्व रोजगार के अवसर अपलब्ध कराने का प्रयास।
  • स्व सहायता समूह एवं स्वरोजगारियों के द्वारा उत्पादित वस्तुओं का प्रदर्षन एवं विक्रय ।
  • राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के मेलों का आयोजन ।
  • स्वरोजगरियों को उनके उत्पादों का विषिष्टता प्रदान करने के लिये प्रषिक्षण, संसोधन एवं मार्गदर्षन प्रदान करना।
  • भोपाल हाट रिसार्स सेंटर, डिजाइन डेवलपमेंट केन्द्र की स्थापना।
  • एन.जी.ओ. कंपनी, सरकारी निगम व संस्थान की सहभागीदारी में वितरण व्यवस्था के संबंध में व्यवसायी तैयार करना।
  • स्वरोजगारियों के उत्पादों का बीमा, भंडारगृह एवं वितरण व्यवस्था करना।
  • प्रदेष के स्व सहायता समूहों के उत्पादों को प्रदर्षन हेतु पुरूस्कृत किया जाना।
  • भोपाल हाट एवं ग्रामीण हाटों में व्यापारिक मेलों का आयोजन किया जाना।
  • मध्यप्रदेष राज्य को ग्रामीण उत्पादों के क्षेत्र में आदर्ष प्रदेष बनाए जाने पर कार्य करना।
  • ग्रामीण शिल्पियों स्व सहायता समूहों का डाटा बैस तैयार करना।
  • ग्रामीण गरीबों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्टीय बाजार में स्थापित करने केे लिये प्रयास करना।
  • गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले उत्पादकों और बाजारों के मध्य मध्यस्थ की भूमिका बनाकर उतपादकों एवं उपभोक्ताओं को सीधे जोड़ना।